रेजांगला के शूर वीर
(आल्हा)
मात सरस्वति करूँ स्तुति, देना मेरी कलम सँवार।
रेजांगला की शौर्यकथा को,गाऊँ देना शब्द अपार।
भारत की सेना अलबेली, गाथा जिसकी अपरम्पार।
जिसके सम्मुख दुश्मन आते, जाते अपनी हिम्मत हार ।।
सरहद की रक्षा में रहते, लड़ते रण में सीना तान ।
गाते गाते वन्दे मातरम, दे जाते हैं अपनी जान ||
अमर शहीदों की गाथाएँ,जब-जब गाये हिन्दुस्तान।
तब चुशूल की चौकी वाले, आदर पावें वीर जवान ।।
वंशी बजैया के छैया हैं, जिनके अदभुत हैं किरदार।
संकट पड़े देश पै तब ये, लेते चक्र सुदर्शन धार ।।
देश-भक्त निर्भीक निडर हैं, साहस के होते पर्याय ।
देश धर्म को धरम मानते, सहन नहीं करते अन्याय ॥
वीर अहीरों की यशगाथा, मित्रो तुमको आज बतांय।
शौर्य पराक्रम यदुवीरों का, सुन कर लोग दंग रह जांय ॥
सन बासठ में युद्ध हुआ जब, भारत और चीन दरम्यान ।
धोखेबाज चीन के हाथों, हार गया था हिन्दुस्तान ।।
रेजांगला के ऊपर अपनी, दृष्टि गढ़ाये बैठा चीन ।
सोच रहा था आसानी से, अब हम लेंगे इसको छीन ।।
तेरह कुमाऊँ रेजीमेण्ट की, वहाँ कम्पनी 'सी' तैनात ।
दुर्गम घाटी में वर्फीले, चक्रवात के थे हालात ।।
सनन सनन सन तेज हवा थी, और बर्फ की थी बौछार'
बिन साधन के डटे हुए थे, चौकी चुशूल के चौकीदार ॥
सम्पर्क कटा था मुख्यालय से, संकट बढ़ा रसद का आय।
मेजर शैतान सिंह तब बोले, जिसको जाना है वो जाय ।।
लेकिन वीर अहीरों ने मेजर से कहा सुनो सरदार ।
कायर कौम नहीं यादव की नहीं देश के हम गद्दार ।
कतरा-कतरा हम लोहू का, अपना देंगे यहीं चढ़ाय ।
भुस भर देंगे हम दुश्मन के, देंगे उनकी लाश बिछाय ।
सीना फूल गया मेजर का, भरी गर्व से फिर हुंकार । '
जर्रे- जर्रे गूंज उठी थी, ददा किशन की जय जयकार
गोलाबारूद और तोप संग, चीनी सेना कई हजार ।
18 नवम्बर स्याह रात थी, उसने किया अचानक वार ।
नर नाहर शैतान सिंह के, भाँप गये दुश्मन की चाल ।
अरि पै टूट पड़े झटके में, सिर पै बाँध लिया था काल ।
तड़ तड़ तड़ तड़ गोली चलती, जाती आसमान को चीर ।
छः हजार शत्रु के सम्मुख, एक सौ बीस डटे थे वीर
बड़े लडैया अपने भैया, टूट पड़े थे बन कर काल।
आँखों में अंगारे दहके, ठोंकी सबने अपनी टाल।।
कटि-कटि रुण्ड गिरे अवनी पर, सिंहों पर था खून सवार।
संग भवानी लड़ी जंग में, लेकर खप्पर और कटार।
एक-एक ने सौ-सौ मारे, दुश्मन गया सनाका खाय ।
गोली खत्म हुई तो बट से, परखच्चे से दिये उड़ाय ॥
सत्रह सौ गिन-गिन कर मारे, हा हाकार दिया मचवाय ।
लड़े आखिरी साँस तलक, दुश्मन पीछे दिये हटाय।।
इतिहास बना के गये स्वयं का, उन वीरों को करूँ प्रणाम।
रण वीरों की यशगाथा को, गाता रहे सदा बलराम ॥
-बलराम सरस
(एटा)