परिधि तुम्हारे पंखों की लो
रहे हितैषी खींच
चिरैया बचकर रहना
प्रगतिशील के पाँवों में वे
बेड़ी डालेंगे
तेरे चिन्तन को भी पगली
देखे-भालेंगे
चले पहन दस्तार सिरों पर
झूठे होते, भींच
चिरैया बचकर रहना
नियम कायदे वाले अपने
मंतर फूँकेंगे
करने वश में तुझे नहीं वे
जंतर चूकेंगे
छल के हारिल करके धोखा
देंगे आँखें मींच
चिरैया बचकर रहना
साँसें कितनी लेना कैसे
वही निकालेंगे
चाल-चलन की पोथी-पत्री
सभी खँगालेंगे
संघर्ष सभी तुम जारी रखना
भले उछालें कीच
चिरैया बचकर रहना
-अनामिका सिंह
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