रे कवि मन आवारा लिख
कब जीता कब हारा लिख
बैरन महंगाई में मुफलिस
कैसे करें गुजारा लिख
औंधे मुँह सच कहने वाला
झूठे की पौवारा लिख
मुफलिस की कोई नहीं सुनता
ईश्वर एक सहारा लिख
फुटपाथों पर लाखों बंदे
शून्य के नीचे पारा लिख
संज्ञा सून्य हो गए रिश्ते
पैसा सबको प्यारा लिख
नफरत घूमे सीना ताने
प्रेम जगत बेचारा लिख
मेरा वतन महकता गुलशन
हमें जान से प्यारा लिख
सर्वधर्म समभाव पुरातन
अपना प्यारा नारा लिख
घुट-घुट कर के जीना मरना
हमको नहीं गवारा लिख
ज्ञान बाँटते रहते निर्झर
दीप तले अँधियारा लिख
-सत्येन्द्र निर्झर
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