रामराज की, जय हो, जय हो
आग लगा दी पानी में
लिए आस्था मंदिर जाकर
बुत के पढ़े कसीदे
सत्ता कैसी अखिल विश्व की
मूँदे अपने दीदे
नाप-जोख का आलम देखे
दुःख से भरी कहानी में
ठकुरसुहाती करें चौधरी
डाल बुद्धि पर ताला
बड़े रूप के चिंतन में भी
जातिवाद का जाला
घायल बचपन हुआ, बिलोते
कट्टर धर्म मथानी में
अनाचार की विषबेलों ने
जहर हवा में घोला
चेलों का पाखंड माथ पर
बनकर उभरा रोला
नहीं उड़ेला जाता सिर पर
पानी चढ़ी जवानी में
-अनामिका सिंह
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