Wednesday, December 28, 2022

मैं नौसिखिया कलम

मैं नौसिखिया 
कलम चलाना सीख रहा हूँ 

अक्षर-अक्षर जोर लगाना, 
शब्द शब्द का मन महकाना  
स्वर यति लय के आगे पीछे 
सरगम ताल के ऊपर नीचे 
 काव्य गली में आना जाना 
सीख रहा हूँ
मैं नौसिखिया 
कलम चलाना सीख रहा हूँ

अलंकार रस पद वंदों में 
हृस्व दीर्घ गणना छंदों में 
गीत ग़ज़ल की गहि गहि बाँहें, 
ढूँढ रहा जीवन की राहें 
गीतों में सुरताल सजाना 
सीख रहा हूँ
मैं नौसिखिया... 

कठिन रास्ते इस जीवन के, 
खाली-खाली तन्हा मन के 
नादां पंछी को समझाना, 
नई सोच के पंख लगाना 
कविता में सद्भाव जगाना 
सीख रहा हूं मैं 
मैं नौसिखिया ...

तुलसी केशव सूर कबीरा , 
ग़ालिब मीर बिहारी मीरा 
धनानंद सा प्रेम तराना, 
रंग के जैसा रंग जमाना 
महादेवी सा मन 
महकाना सीख रहा हूँ
मैं नौसिखिया ...

अम्बर के निशब्द नजारे, 
 वसुंधरा के सुख-दुख सारे
 मनहर चमन सुखद कलियों के 
गाँव नगर कलरव गलियों के 
शब्दों से तस्वीर सजाना 
सीख रहा हूँ
मैं नौसिखिया ...

-सत्येन्द्र निर्झर

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