रिक्त उदर में जले अँगीठी
आँत करे उत्पात
कतर-ब्योंत को मिली महारत
खींचे खड़ी लकीर
कंबल वितरण, हाथ मदद के
खिंचवाएँ तस्वीर
घना कुहासा आँगन फैला
औंधी पड़ी परात
प्यास न अधरों की बुझ पायी
भरे नयन में नीर
खरपतवार -सरीखे ऊगी
रोपी आस उशीर
पिण्ड नीति के आसमान से
करते उल्कापात
राजमुकुट के चाल-चलन को
देख रहा गणतंत्र
लाल किले की सीख सयानी
बना रही परतंत्र
वादों की नंगी तकली पर
रहे सूत को कात
-अनामिका सिंह
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