Wednesday, December 28, 2022

आँत करे उत्पात

रिक्त उदर में जले अँगीठी 
आँत करे उत्पात 

कतर-ब्योंत को मिली महारत
खींचे खड़ी लकीर
कंबल वितरण, हाथ मदद के 
खिंचवाएँ तस्वीर 
घना कुहासा आँगन फैला
औंधी पड़ी परात 

प्यास न अधरों की बुझ पायी 
भरे नयन में नीर 
खरपतवार -सरीखे ऊगी
रोपी आस उशीर 
पिण्ड नीति के आसमान से
 करते उल्कापात 

राजमुकुट के चाल-चलन को
देख रहा गणतंत्र 
लाल किले की सीख सयानी
 बना रही परतंत्र 
 वादों की नंगी तकली पर
 रहे सूत को कात 
            
-अनामिका सिंह

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