Monday, May 27, 2019

जीवन वन में नागफ़नी ही दिन दिन सघन हुई

जीवन वन में नागफ़नी ही दिन दिन सघन हुई
जितनी सुविधा बढ़ी ज़िंदगी उतनी कठिन हुई

चौड़ी सड़कें जाम लगाये देतीं हैं अवसाद
धीरे-धीरे आज आ रही पग डंडी की याद
राम-राम की राही से परिपाटी दफन हुई
जितनी सुविधा ............................

भाषा हुई परिष्कृत पर भावों का लोप हुआ
सम्बन्धों पर स्वारथ का साबित आरोप हुआ
चाटुकारिता सब कथनों में ऊँचा कथन हुई
जितनी सुविधा ...........................

इस विकसित दुनिया से अच्छी थी वह पहली दुनिया
जितने आविष्कार हुए उतनी ही दहली  दुनिया
जितना मरहम लगा घाव पर उतनी जलन हुई
जितनी सुविधा ..........................

अग्रिम पँक्ती प्रेरक है पीछे तक अनाचरण में
अति सभ्यों की बिटियां देखी अब्बल अनावरण में
स्वर्ण कुंड में परिवर्तन की आशा हवन हुई
जितनी सुविधा बढ़ी ज़िंदगी उतनी कठिन हुई
           
-डॉ अजय अटल
कासगंज 

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