ग़म कभी है, कभी ख़ुशी दौलत
आस हर दिल की है, रही दौलत
दोस्ती पल में टूट जाती है
बीच आती है जब कभी दौलत
रब का जब आखिरी बुलावा हो
तब नहीं कुछ भी काम की दौलत
प्यार से इसको बैर रहता है
बस सीखाती है बेरुखी दौलत
डोलते रहना इसकी फितरत है
कब किसी एक दर रुकी दौलत
-हीरालाल
आस हर दिल की है, रही दौलत
दोस्ती पल में टूट जाती है
बीच आती है जब कभी दौलत
रब का जब आखिरी बुलावा हो
तब नहीं कुछ भी काम की दौलत
प्यार से इसको बैर रहता है
बस सीखाती है बेरुखी दौलत
डोलते रहना इसकी फितरत है
कब किसी एक दर रुकी दौलत
-हीरालाल
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