हरिया और रहमान
साथ-साथ करते हैं
मजूरी
गुडियों से
साथ-साथ खेलती हैं
नन्हीं शन्नो और सरसुती
गल्ला मंडी में
बतूलन और बिट्टो
साथ-साथ लगाती हैं
छँटना
इन्हें
फ़ुर्सत ही कहाँ है
किसी मंदिर-मस्जिद
संत या पीर के पास
जाने की
ये तो बेचारे
दो रोटी की जुगाड़ में
दिन रात
यूँ ही खटते रहते हैं
कोल्हू के बैल की
तरह
-बलराम सिंह सरस
साथ-साथ करते हैं
मजूरी
गुडियों से
साथ-साथ खेलती हैं
नन्हीं शन्नो और सरसुती
गल्ला मंडी में
बतूलन और बिट्टो
साथ-साथ लगाती हैं
छँटना
इन्हें
फ़ुर्सत ही कहाँ है
किसी मंदिर-मस्जिद
संत या पीर के पास
जाने की
ये तो बेचारे
दो रोटी की जुगाड़ में
दिन रात
यूँ ही खटते रहते हैं
कोल्हू के बैल की
तरह
-बलराम सिंह सरस
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