Sunday, January 8, 2017

रोटियाँ

तेरी मेरी सबकी ही दरकार हैं ये रोटियाँ
आदमी के जीने का आधार हैं ये रोटियाँ

बाँध रक्खा है सभी को अपने मायाजाल में
हर खुशी हर ग़म की जिम्मेदार हैं ये रोटियाँ

कर्म करके गर मिलें तो हैं ये अमृत की तरह
माँग कर खायें तो फिर बेकार हैं ये रोटियाँ

हर किसी को ये नचाती हैं बड़े ही शौक से
भूख के आगे मगर लाचार हैं ये रोटियाँ

हर हकीकत इनके आगे यार है फीकी बड़ी
आजकल सबसे बड़ी सरकार हैं ये रोटियाँ

-हीरालाल यादव

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