समय की माँग को ठुकरा नहीं सकते
हमेशा झुनझुने बहला नहीं सकते
जिदों तक आ गई है भूख बच्चों की
बहाने देर तक टहला नहीं सकते
हुकूके-पेट का इक मसअला हूँ मैं
सियासी बात से सुलझा नहीं सकते
तुम्हारी पीर है वाजिब बिछडने पर
हमारा दर्द भी झुठला नहीं सकते
जड़ों को छू गई है धार खुरपी की
ये पौधे धूप से मुरझा नहीं सकते
-अर्जुन सिंह यादव लिहाज़
हमेशा झुनझुने बहला नहीं सकते
जिदों तक आ गई है भूख बच्चों की
बहाने देर तक टहला नहीं सकते
हुकूके-पेट का इक मसअला हूँ मैं
सियासी बात से सुलझा नहीं सकते
तुम्हारी पीर है वाजिब बिछडने पर
हमारा दर्द भी झुठला नहीं सकते
जड़ों को छू गई है धार खुरपी की
ये पौधे धूप से मुरझा नहीं सकते
-अर्जुन सिंह यादव लिहाज़
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