इतिहास बँटने लगा है
छोट-छोटे टुकड़ों में
यह हमारा इतिहास,
यह तुम्हारा इतिहास
इतिहास की किताबों में
नहीं दिखती अब
एकता-अखंडता की भावना
इतिहास पुनर्लेखन की आड़ में
बस उभारा जाता है
जाति, धर्म, क्षेत्र का इतिहास
इतिहास के पन्नों पर
गिद्ध-नजर गड़ाये
हर वर्ग के मठाधीश
इनका वश चले तो
लटका दें अपनी तख्ती
हर महापुरुष के चेहरे पर
और कैद कर दें उन्हें
अपनी तिजोरी में
कि, कहीं वे
दल-बदल न कर लें
-कृष्ण कुमार यादव
छोट-छोटे टुकड़ों में
यह हमारा इतिहास,
यह तुम्हारा इतिहास
इतिहास की किताबों में
नहीं दिखती अब
एकता-अखंडता की भावना
इतिहास पुनर्लेखन की आड़ में
बस उभारा जाता है
जाति, धर्म, क्षेत्र का इतिहास
इतिहास के पन्नों पर
गिद्ध-नजर गड़ाये
हर वर्ग के मठाधीश
इनका वश चले तो
लटका दें अपनी तख्ती
हर महापुरुष के चेहरे पर
और कैद कर दें उन्हें
अपनी तिजोरी में
कि, कहीं वे
दल-बदल न कर लें
-कृष्ण कुमार यादव
No comments:
Post a Comment