उदय प्रताप सिंह
1932 में मैनपुरी, उ०प्र० में जन्में उदय प्रताप सिंह अपने छात्र जीवन से ही छन्द रचने लगे थे। किशोरवय में मार्क्सवाद की ओर रुझान हुआ। अंग्रेजी एवं हिन्दी में एम.ए. किया। अंग्रेजी के प्राध्यापक के रूप में लोकप्रिय और प्रतिष्ठित रहे। मदन इंटर कालेज़, भोगाँव और नारायण इंटर कालेज, शिकोहाबाद में 18 वर्षों तक प्राचार्य का पद सँभाला।
1989 में लोकसभा के सदस्य के रूप में मैनपुरी क्षेत्र से निर्वाचित हुए। 1997 से 2000 तक राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य के रूप में कार्य किया। दो बार राज्य सभा के सदस्य के रूप में उत्तर प्रदेश से मनोनयन। संप्रति राज्यसभा के सदस्य के रूप में देश सेवा एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के उपाध्यक्ष।
1993 में सूरीनाम में आयोजित विश्व हिन्दी सम्मेलन में भारतीय साहित्यकारों का नेतृत्व किया। अब तक 17-18 देशों की यात्रा। सांसद होते हुए भी बेहद फ़क्कड़, सहज और धरती से जुड़े व्यक्ति।
संपर्क : 19 फ़िरोज़ शाह रोड़ नई दिल्ली-110001
1932 में मैनपुरी, उ०प्र० में जन्में उदय प्रताप सिंह अपने छात्र जीवन से ही छन्द रचने लगे थे। किशोरवय में मार्क्सवाद की ओर रुझान हुआ। अंग्रेजी एवं हिन्दी में एम.ए. किया। अंग्रेजी के प्राध्यापक के रूप में लोकप्रिय और प्रतिष्ठित रहे। मदन इंटर कालेज़, भोगाँव और नारायण इंटर कालेज, शिकोहाबाद में 18 वर्षों तक प्राचार्य का पद सँभाला।
1989 में लोकसभा के सदस्य के रूप में मैनपुरी क्षेत्र से निर्वाचित हुए। 1997 से 2000 तक राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य के रूप में कार्य किया। दो बार राज्य सभा के सदस्य के रूप में उत्तर प्रदेश से मनोनयन। संप्रति राज्यसभा के सदस्य के रूप में देश सेवा एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के उपाध्यक्ष।
1993 में सूरीनाम में आयोजित विश्व हिन्दी सम्मेलन में भारतीय साहित्यकारों का नेतृत्व किया। अब तक 17-18 देशों की यात्रा। सांसद होते हुए भी बेहद फ़क्कड़, सहज और धरती से जुड़े व्यक्ति।
संपर्क : 19 फ़िरोज़ शाह रोड़ नई दिल्ली-110001
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