मोती मणि माणिक पै भारी परै ब्रज रज,
स्वर्ग सुखु सारौ हारौ कुञ्ज की विहार पै।
जोगी जती हारि गये गोकुल के छोरन तें,
अप्सराहू भरें पानी गोपिन के द्वार पै।
घनानंद रसखान सूर लिखि लिखि हारे,
मीरा ने सर्वस्यु हारौ नन्द के कुमार पै।
करील औ कदम्ब के समक्ष हारौ कल्प बृक्ष,
दुनिया को दुखु हारौ जमुना की धार पै।
-बलराम सरस
स्वर्ग सुखु सारौ हारौ कुञ्ज की विहार पै।
जोगी जती हारि गये गोकुल के छोरन तें,
अप्सराहू भरें पानी गोपिन के द्वार पै।
घनानंद रसखान सूर लिखि लिखि हारे,
मीरा ने सर्वस्यु हारौ नन्द के कुमार पै।
करील औ कदम्ब के समक्ष हारौ कल्प बृक्ष,
दुनिया को दुखु हारौ जमुना की धार पै।
-बलराम सरस
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