Sunday, July 17, 2016

कहाँ गई बैलों की जोड़ी

कहाँ गई
बैलों की जोड़ी
कहाँ गये हरवारे

बछड़ा गाय
चिह्न रखते थे
राजनीति के पण्डे
खेत जोतता कृषक
और हलधर
से चित्रित झण्डे
आवारा अब
बैल घूमते
भूखा कृषक पुकारे

चली रसायन खादें
अब गोबर की
कौन सुने
बीज हाइब्रिड
हैं महँगे
लेने को शीश धुने
घर की चीजें
सब असफल अब
कैसे लगे किनारे

खर्चीला
खेती का धन्धा
मुश्किल मूल बचे
हाट बना
पूँजीपतियों ने
मिल षड्यंत्र रचे
खुद पर निर्भर
रहने वाले
पराधीन कर डारे

-राम नरेश रमन
[ मोठ, झाँसी]

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