नयनों से सपनों में आना
सपनों से हृदय पर छाना
कभी हँसाना कभी रुलाना
कभी मुकरना प्यार जताना
तुमको खेल बहुत आते हैं
हम फरेब से घबराते हैं
उकसाना फिर आग लगाना
सोये मन के भाव जगाना
दे कर ज़ख्म उन्हें सहलाना
अपनेपन का राग रटाना
कौतुक तुम्हें बहुत भाते हैं
हम फरेब से घबराते हैं
भावों में यदि भेदभाव हो
बात-बात पर जब तनाव हो
तालमेल का भी अभाव हो
ऊपर-ऊपर का जुड़ाव हो
तब रिश्ते बस भरमाते हैं
हम फरेब से घबराते हैं।।
-बलराम सिंह सरस
सपनों से हृदय पर छाना
कभी हँसाना कभी रुलाना
कभी मुकरना प्यार जताना
तुमको खेल बहुत आते हैं
हम फरेब से घबराते हैं
उकसाना फिर आग लगाना
सोये मन के भाव जगाना
दे कर ज़ख्म उन्हें सहलाना
अपनेपन का राग रटाना
कौतुक तुम्हें बहुत भाते हैं
हम फरेब से घबराते हैं
भावों में यदि भेदभाव हो
बात-बात पर जब तनाव हो
तालमेल का भी अभाव हो
ऊपर-ऊपर का जुड़ाव हो
तब रिश्ते बस भरमाते हैं
हम फरेब से घबराते हैं।।
-बलराम सिंह सरस
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