माटी की सोंधी सुगंध सनी मनमोहिनी है रसखान की भाषा
शब्द ढरे, निखरे, सुथरे भई हीरकनी रसखान की भाषा
रीझी है कान्ह की कामरिया पै बनी बँसुरी रसखान की भाषा
स्याम नचैं छछिया भरि छाछ पै देखि हँसै रसखान की भाषा
-डा० जगदीश व्योम
शब्द ढरे, निखरे, सुथरे भई हीरकनी रसखान की भाषा
रीझी है कान्ह की कामरिया पै बनी बँसुरी रसखान की भाषा
स्याम नचैं छछिया भरि छाछ पै देखि हँसै रसखान की भाषा
-डा० जगदीश व्योम
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