किसने किसको क्या दिया, किसका करें यकीन।
स्वारथ के संसार में, सपनों की तौहीन।।
माया के बाज़ार में, बहुरंगी हर चीज।
यूं भटका मन बावरा, ज्यों ऊसर में बीज।।
रतनारे लोचन सजल, हृदय अनकही पीर।
बिन प्रियतम लू सम लगे, शीतल मन्द समीर।।
नेह पगीं रस से भरीं, बतियाँ रतियाँ मौन।
साजन रूठे री सखी, उत्तर दे अब कौन।।
-पुष्पेन्द्र पुष्प
जालौन (उ.प्र.)
स्वारथ के संसार में, सपनों की तौहीन।।
माया के बाज़ार में, बहुरंगी हर चीज।
यूं भटका मन बावरा, ज्यों ऊसर में बीज।।
रतनारे लोचन सजल, हृदय अनकही पीर।
बिन प्रियतम लू सम लगे, शीतल मन्द समीर।।
नेह पगीं रस से भरीं, बतियाँ रतियाँ मौन।
साजन रूठे री सखी, उत्तर दे अब कौन।।
-पुष्पेन्द्र पुष्प
जालौन (उ.प्र.)
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