Sunday, June 5, 2016

व्यर्थ हम डरते

विश्वगुरु शर्मसार हो रहा है अपनों से,
किन्तु नहीं अब भी क्यों परबाह करते।
दिल्ली दिल वालों की है कहें सीना तानकर,
उसको ही निरलज्ज दागदार करते।
लगती डरावनी सी बसें भी रमन अब,
जाने कौन कहाँ कैसे कैसे हैं विचरते।
नंगा नाच करने पै आ गये हैं दुशासन,
मिलके खदेडो इन्हें व्यर्थ हम डरते।

-राम नरेश रमन

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