वंशी और चक्र
कविता की पाठशाला
हिंदी की सौ सर्वश्रेष्ठ प्रेम कविताएँ
link
व्योम के पार
कविता की पाठशाला
Wednesday, December 28, 2022
ग़ज़ल
ज़ुल्म देखा जिधर गयीं आँखें
होके पत्थर ठहर गयीं आँखें
तुमसे कैसा अजीब रिश्ता है
याद आई कि भर गयीं आँखें
धड़कने आँख–आँख कहतीं हैं
एक जादू सा कर गयीं आँखें
इनकी मजबूरियाँ हीं ऐसी थीं
प्यार करके मुकर गयीं आँखें
-उषा यादव उषा
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment