वंशी और चक्र
कविता की पाठशाला
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व्योम के पार
कविता की पाठशाला
Wednesday, December 28, 2022
माहिया
दिन-रात बरसते हैं
मेरे ये नैना
साजन में बसते हैं
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ये पूरब की लाली
मेट गई देखो
आखिर रजनी काली
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आँखों में बसते हैं
सपने जीवन के
हम-आप तरसते हैं
-राम सागर यादव
-राम सागर यादव
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