Wednesday, December 28, 2022

ग़ज़ल

छोड़कर सबके लिए रस्ता चले
इसलिए ही उम्र भर तन्हा चले

तय किया कैसे सफर मत पूछ तू
पाँच में बाँधे हुए सहरा चले 

सांस भी कुछ इस तरह चलती रही,
जिस तरह मजदूर का खर्चा चले

इस तरह गुजरा हूँ तेरी याद में,
भीड़ मे ज्यो गुमशुदा बच्चा चले

टूटने के बाद भी कोशिश रही,
जिस तरह से हो सके रिश्ता चले

यह असर भी कम नहीं है आपका,
आप ना हों आपकी चर्चा चले

-राहुल यादव

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