Wednesday, December 28, 2022

हाइकु

शब्द ख़ामोश 
चीख़ता हुआ मौन 
घुटते रिश्ते 
     **

शाम होते ही
घोसलों में लौटती 
नई उम्मीदें 
    **

शर्मीला चाँद 
ताकता बादलों से 
सजती धरा 
    **

चंचल धूप 
थिरकती फिरती
यहाँ से वहाँ


रोटी का कर्ज़ 
बढ़ता दिनोदिन
पूरी उमर
    **

रिश्ते नाज़ुक 
चलना रस्सी पर
निभाना इन्हें
    **

सागर खारा 
जानती है सरिता 
है अभिशप्त
    **

-डॉ.सुनीता यादव

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