काश !
बनाये जाते न
बस्तु' पूजा की
चक्र धारी श्याम
करुणा कारी राम
आचरण में ढाले गये होते
पत्थर मूर्ति की जगह
हृदय में बिठाले गये होते
पूजा 'धूप' से हट कर
कर्म से हम कर पाये होते
चरण चिह्नों पर उनके
हम चल पाये होते
तो
जन-जन होता श्याम
जन-जन होता राम
होता न खेल शैतानियत का
यों सरे आम
फ़िर क्यों कर कोई
जख्मों को सहता
भारत विश्व गुरु था...
विश्व गुरु ही रहता....!!
-डा.विजय यादव "निर्मल"
शिकोहाबाद, यू.पी.
बनाये जाते न
बस्तु' पूजा की
चक्र धारी श्याम
करुणा कारी राम
आचरण में ढाले गये होते
पत्थर मूर्ति की जगह
हृदय में बिठाले गये होते
पूजा 'धूप' से हट कर
कर्म से हम कर पाये होते
चरण चिह्नों पर उनके
हम चल पाये होते
तो
जन-जन होता श्याम
जन-जन होता राम
होता न खेल शैतानियत का
यों सरे आम
फ़िर क्यों कर कोई
जख्मों को सहता
भारत विश्व गुरु था...
विश्व गुरु ही रहता....!!
-डा.विजय यादव "निर्मल"
शिकोहाबाद, यू.पी.
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