Sunday, July 31, 2016

तुम बुरे समय पर निगाह रखो

-रामलखन यादव  

तुम बुरे समय पर निगाह रखो
क्योंकि
वह है तुम्हारी ताक में
तुम रहो अधिकाधिक संवेदनशील
ताकि रचे जा सकें शब्द !

इससे पहले कि
समय तुम पर झपट्टा मारकर
दबोच ले तुम्हारा मुँह
तुम रहो सतर्क
और
दर्ज करो उसके रूप-रंग
ताकि उसे किया जा सके
गिरफ्तार !

तुम निष्कपट दृष्टि से
देखो उस आदमी को
जो बुरे समय के पक्ष में
दर्ज कर रहा है
अपने दस्तखत
तुम दर्ज करो कि
वह आदमी
कब से पैना कर रहा है
अपनों के खिलाफ
चाकू !

तुम
कभी यकीन मत करो कि
समय सभी को
कर देता है पराजित
क्योंकि
मैं देखता हूँ
कभी-कभी आदमी को
समय से
बहुत आगे निकल जाते हुए !

तुम अब
समय को पछाड़ कर
उसके ऊपर दर्ज करो
अपनी विजय
और
अपने समय के लोगों को
बताओ कि
कैसे पछाड़ा जाता है
बुरे समय को !

तुम बुरे समय में
खोई हुई वस्तुओं को
मत खोजो
बल्कि
करो आग को प्रज्ज्वलित
और उसकी रोशनी में
बुरे समय को करो
दृष्टगोचर !

देखो कि
नीला आकाश
कैसे मटमैला हो जाता है
दिशाएँ कैसे भर जाती हैं
धुंध से
बुरे समय में आदमी
कैसे हो जाता है
दिशाहीन
अकाल
पृथ्वी पर कब पसारने लग जाता है
अपने पाँव !

हाँ
बुरे समय में तुम
मृत लोगों की तलाश मत करो
बल्कि
प्रकाश में तुम देखो बुरे समय को
और उसके खिलाफ
कार्यवाही की करो
एक ताजा शुरुआत !!

-रामलखन यादव
(आजकल, जुलाई 1994 से साभार)

No comments:

Post a Comment