Sunday, July 17, 2016

नन्हा कुबेर

वह बच्चा
जो चीख मारकर
माँ का आँचल पा लेता है
प्रभु-सा संबल पा लेता है
वह नन्हा कुबेर किस्मत का
ममता की दौलत है जिसपर, मैं हूँ
मुझको माँ से बहुत प्यार है

वह बच्चा
जो पाँव बढ़ाकर
जीवन की अनजान डगर पर
चला, गिरा तो सदा संभाला
अन्न दिया और जिसको पाला
ऋण धरती का जिसके तन पर, मैं हूँ
मुझे धरा से बहुत प्यार है

वह बच्चा
जो यौवन रथ पर
चढ़ने को दिखता है तत्पर
संस्कृति का पोषण करने को
बदरंग सभ्यता में इन्द्रधनुष के रंग भरने को
भटक रहा है, झटक रहा है नन्हें कर, मैं हूँ
मुझे सृजन से बहुत प्यार है

वह बच्चा,
जो चला उमर भर
साँसों की डोरी पर चढ़कर
अपनों की, सपनों की खातिर
बोझ उठाये हुए थकन का
ढूढ़ रहा है गाँव सजन का, मैं हूँ
मुझे सजन से बहुत प्यार है
महामिलन का इन्तज़ार है


-डा० राजीव राज

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