-जयराम जय
गँवों की चौपालों ने
बतियाना छोड़ दिया
इसीलिये तो खुशियों ने
मुस्काना छोड़ दिया
तोता-मैना राजा-रानी
जलते हुये अलाव
दुर्लभ है सब यहाँ
बताओ कहाँ नेह का भाव
रचे बसे त्यौहारों ने
घर आना छोड़ दिया
लिपे-पुते चेहरों की
रौनक दिखती है अब गुम
हम दिल वाले राजी हैं
तो क्या कर लोगे तुम
दुल्हन ने घूँघट करना
शरमाना छोड़ दिया
राग नहीं अनुराग
नहीं है कोई आँगन में
आँख का पानी सूख गया है
प्रिय मनभावन में
भाभी ने हँसी-ठिठोली
हड़काना छोड़ दिया
दरवाजे का पेड़ पुराना
गुमसुम रहता है
कोई आये कुछ कह जाये
सब चुप सहता है
रूठ गई गौरैया
आबो-दाना छोड़ दिया
बहुत दिनों से खोज
रहा है 'खुशियां' चौकीदार
अधरों पर मुसकानें क्यों हैं
चिपकी हुयी उधार
मिलके घर बनवाना
छप्पर छाना छोड़ दिया
गाँवों की चौपालों ने
बतियाना छोड़ दिया
इसीलिये तो खुशियों ने
मुसकाना छोड़ दिया
-जयराम जय
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