Monday, May 23, 2016

बाल कविता

नखरेबाजी

अरे-अरे, क्या करते जी
खाने में नखरेबाजी ?
सब्जी रोटी सरकाई
दाल भी तुमको न भाई
छोड़ रहे मूली ताजी
यह कैसी नखरेबाजी ?

बुरी बात मुँह बिचकाना
शुरू करो चावल खाना
माँगो जल्दी से भाजी
बहुत हुई नखरेबाजी !
खाओ खुश होकर खिचड़ी
यह भी तो स्वादिष्ट बड़ी
अरे दही से नाराजी
छोड़ो भी नखरेबाजी

ठंडा शरबत पी करके
आइसक्रीम पर जी करके
हारोगे जीती बाजी !
दुख देगी नखरेबाजी !

-उषा यादव

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