सोचो गीत पुराने कितने
सोचो गीत पुराने कितने
जब धरती पर जीवन आया
प्रकृति पुरुष की माया छाया
जब आंखों ने पीड़ा देखी
जब बरखा ने मन हरषाया
हृदय कलश से छल-छल छलके
नव रस की धारा में सपने
सोचो गीत पुराने कितने
सोचो गीत पुराने कितने
जितनी अंबर की ऊँचाई
जितनी सागर की गहराई
जितनी नदिया ताल सुहाने
जितनी सूरज की अरुणाई
जितने प्रेम लिखी आंखों से
झर झर झरते मोती सपने
सोचो गीत पुराने कितने-
सोचो गीत पुराने कितने
दूर गगन में सूरज आया
चंदा ने चकोर भरमाया
शांत समंदर की लहरों ने
निश्चल उच्छल रूप दिखाया
खोल पोटली अंतस पट की
रत्न दिए सागर ने जितने
सोचो गीत पुराने कितने
-सोनम यादव
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