Wednesday, December 28, 2022

सोचो गीत पुराने कितने

सोचो गीत पुराने कितने
सोचो गीत पुराने कितने

 जब धरती पर जीवन आया 
प्रकृति पुरुष की माया छाया 
जब आंखों ने  पीड़ा देखी
 जब बरखा ने मन हरषाया

हृदय कलश से छल-छल छलके 
नव रस की धारा में सपने 
सोचो गीत पुराने कितने 
सोचो गीत पुराने कितने 

जितनी अंबर की ऊँचाई 
जितनी सागर की गहराई 
जितनी नदिया ताल सुहाने
 जितनी सूरज की अरुणाई 

जितने प्रेम लिखी आंखों से
 झर झर झरते मोती सपने 
सोचो गीत पुराने कितने-
सोचो गीत पुराने कितने 

दूर गगन में सूरज आया 
चंदा ने चकोर भरमाया
 शांत समंदर की लहरों ने 
निश्चल उच्छल रूप दिखाया 

खोल पोटली अंतस पट की 
रत्न दिए सागर ने जितने
सोचो गीत पुराने कितने

-सोनम यादव 

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