आँधी से जूझते हुए
घायल
खून से लथपथ
परिंदे के टूटे हुए पंख का
'रंगीन' होना
तुम्हें बहुत भाता है
लिख डालते हो- कविता
नाचती हुई मयूरी-सी
कितना निर्दयी है तुम्हारा
रोमानी भाव-बोध
फिर भी तुम बड़े कवि हो
-सुरेश यादव
घायल
खून से लथपथ
परिंदे के टूटे हुए पंख का
'रंगीन' होना
तुम्हें बहुत भाता है
लिख डालते हो- कविता
नाचती हुई मयूरी-सी
कितना निर्दयी है तुम्हारा
रोमानी भाव-बोध
फिर भी तुम बड़े कवि हो
-सुरेश यादव
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