Friday, September 9, 2016

सबसे ज्यादा गम होते हैं

कितनी पीर बची पीने को
कितने ज़ख्म अभी सीने को
टन भर बाधाएं मिलती हैं
रत्तीभर जीवन जीने को
खुशियों के पल कम होते हैं
सबसे ज्यादा गम होते हैं

जब हो अपना हृदय भारी
दिन उदास हों रातें कारी
खुशियों के मंजर चुभते हैं,
रास न आती दुनिया दारी
कोर नयन के नम होते हैं
सबसे ज्यादा गम होते हैं

दुःख ने समझा पस्त हुए हैं
हम इसके अभ्यस्त हुए हैं
सारे नाटक वो रचता है
हम अभिनय में व्यस्त हुए हैं
कदम-कदम पर भ्रम होते हैं
सबसे ज्यादा गम होते हैं।।
     
-बलराम सरस 

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