Sunday, July 31, 2016

जादूगर अलबेला

-चन्द्रपाल सिंह यादव मयंक

छू काली कलकत्ते वाली
तेरा वचन न जाए खाली

मैं हूँ जादूगर अलबेला
असली भानमती का चेला
सीधा बंगाले से आया
जहाँ-जहाँ जादू दिखलाया
सबसे नामवरी है पाई
उँगली दाँतों तले दबाई
जिसने देखा खेय निराला
जमकर खूब बजाई ताली

चाहूँ तिल का ताड़ बना दूँ
रुपयों का अंबार लगा दूँ
अगर कहो तो आसमान पर
तुमको धरती से पहुँचा दूँ
ऐसे-ऐसे मंतर जांनू
दुख संकट छूमंतर कर दूँ
बने कबूतर, बकरी काली

-चन्द्र पाल सिंह यादव मयंक


No comments:

Post a Comment