दिया रव ने अगर मौका करो सेवा गरीबों की
बड़े होकर बड़ा दिल हो परीक्षा है अमीरों की
कहूँ क्या हाल उसका जो भटकता काम को दर दर
निवाला छीन लेती हैं कुटिल चालें बजीरों की
करे फरियाद वह किससे रहनुमा का सताया है
यहाँ तो बोलियाँ लगतीं नबाबों के जमीरों की
कर्म से भाग्य बनता है सदा ही ध्यान में हो ये
बदल जाती लिखी भाषा सुकर्मों से लकीरों की
किवाड़े बन्द मत करना जरूरतमंद हो दर पर
रमन भारी खजानों पर दुआ पड़ती फकीरों की
-राम नरेश रमन
बड़े होकर बड़ा दिल हो परीक्षा है अमीरों की
कहूँ क्या हाल उसका जो भटकता काम को दर दर
निवाला छीन लेती हैं कुटिल चालें बजीरों की
करे फरियाद वह किससे रहनुमा का सताया है
यहाँ तो बोलियाँ लगतीं नबाबों के जमीरों की
कर्म से भाग्य बनता है सदा ही ध्यान में हो ये
बदल जाती लिखी भाषा सुकर्मों से लकीरों की
किवाड़े बन्द मत करना जरूरतमंद हो दर पर
रमन भारी खजानों पर दुआ पड़ती फकीरों की
-राम नरेश रमन
" निवाला छीन लेती हैं कुटिल चालें बजीरों की"
ReplyDeleteबहुत सटीक बात कही है गजल में सहजता के साथ, वधाई रमन जी
-डा० जगदीश व्योम