-अश्विनी कुमार विष्णु
मेघ से कह दो
अब नहीं संदेशवाहक चाहिए
लीन है अलकापुरी
उन्माद में, रह ले
भोग ले अय्याशियाँ
अतिरेक में बह ले
मेघ से कह दो
अब नहीं आनंद मादक चाहिए
हाँ मेरा सन्ताप ही
सुख की लड़ी है
शूल बिंध बिलखूँ
मुझे भी कब पड़ी है
मेघ से कह दो
अब नया संघर्ष बाधक चाहिए
सच, बँधा तुमसे रहा
ओ मीत मेरे
मुक्त-पर, पर अब
उड़ेंगे गीत मेरे
मेघ से कह दो
अब न कोई पीर-पातक चाहिए !
-अश्विनी कुमार विष्णु
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